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mahabharat 12.47.d9: वराह रूपधारी भगवान को नमस्कार है, जिन्होंने वराह रूप धारण करके अपने एक दाँत से वन और पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षा की थी।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d9
 
 
श्लोक  12.47.d9 
वाराहं रूपमास्थाय महीं सवनपर्वताम्।
उद्धरत्येकदंष्ट्रेण तस्मै क्रोडात्मने नम:॥
 
 
अनुवाद
वराह रूपधारी भगवान को नमस्कार है, जिन्होंने वराह रूप धारण करके अपने एक दाँत से वन और पर्वतों सहित सम्पूर्ण पृथ्वी की रक्षा की थी।
 
Salutations to the Lord in the form of Varaha, who, by assuming the form of Varaha, had saved the entire earth, including the forests and mountains, with one of his teeth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)