श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  12.47.d4 
अव्यक्तबुद्धॺहंकारमनोबुद्धीन्द्रियाणि च।
तन्मात्राणि विशेषाश्च तस्मै तत्त्वात्मने नम:॥
 
 
अनुवाद
उन तत्व परमेश्वर को नमस्कार है, जिनका स्वरूप अव्यक्त प्रकृति, बुद्धि, अहंकार, मन, इन्द्रियाँ, शरीर के अंग और उनके कार्य हैं।
 
Salutations to the elemental Supreme God, whose form is the unmanifested nature, intellect, ego, mind, sense organs, body parts and their functions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)