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mahabharat 12.47.d32: यह अद्भुत विष्णु का स्तोत्र, जिसे गंगानन्दन भीष्म ने पूर्वकाल में गाया था, पूर्ण हो गया है। यह समस्त महान पापों का नाश करने वाला है।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.47.d32 
स्तवराज: समाप्तोऽयं विष्णोरद्भुतकर्मण:।
गाङ्गेयेन पुरा गीतो महापातकनाशन:॥
 
 
अनुवाद
यह अद्भुत विष्णु का स्तोत्र, जिसे गंगानन्दन भीष्म ने पूर्वकाल में गाया था, पूर्ण हो गया है। यह समस्त महान पापों का नाश करने वाला है।
 
This hymn of the wonderful Vishnu, which Ganganandan Bhishma had sung in the past, has been completed. It is the destroyer of all the great sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)