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mahabharat 12.47.d31: जो मनुष्य धनुष-बाण धारण करने वाले यदुकुलनन्दन श्रीकृष्ण की इस स्तुति का स्मरण करते हैं, पढ़ते हैं या सुनते हैं, वे इस शरीर के अन्त होने पर भगवान श्रीकृष्ण में प्रवेश करते हैं। चक्रधारी श्रीहरि उनके समस्त पापों का नाश कर देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d31
 
 
श्लोक  12.47.d31 
(इति स्मरन् पठति च शार्ङ्गधन्वन:
शृणोति वा यदुकुलनन्दनस्तवम्।
स चक्रभृत्प्रतिहतसर्वकिल्बिषो
जनार्दनं प्रविशति देहसंक्षये॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धनुष-बाण धारण करने वाले यदुकुलनन्दन श्रीकृष्ण की इस स्तुति का स्मरण करते हैं, पढ़ते हैं या सुनते हैं, वे इस शरीर के अन्त होने पर भगवान श्रीकृष्ण में प्रवेश करते हैं। चक्रधारी श्रीहरि उनके समस्त पापों का नाश कर देते हैं।
 
Those people who remember, read or listen to this praise of Yadukulnandan Shri Krishna, who holds the bow and arrow, after the end of this body, they enter Lord Shri Krishna. Chakradhari Sri Hari destroys all their sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)