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mahabharat 12.47.d3: विश्वेदेव, मरुद्गण, रुद्र, आदित्य, अश्विनी कुमार, वसु, सिद्ध और साध्य - ये सभी उनके ही विग्रह हैं, उन भगवान् स्वरूप को मैं नमस्कार करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  12.47.d3 
(विश्वे च मरुतश्चैव रुद्रादित्याश्विनावपि।
वसव: सिद्धसाध्याश्च तस्मै देवात्मने नम:॥
 
 
अनुवाद
विश्वेदेव, मरुद्गण, रुद्र, आदित्य, अश्विनी कुमार, वसु, सिद्ध और साध्य - ये सभी उनके ही विग्रह हैं, उन भगवान् स्वरूप को मैं नमस्कार करता हूँ।
 
Vishvedev, Marudgana, Rudra, Aditya, Ashwini Kumar, Vasu, Siddha and Sadhya - all these are their personalities, I salute the God in the form of God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)