श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d27
 
 
श्लोक  12.47.d27 
सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम्।
येषां हृदिस्थो देवेशो मङ्गलायतनं हरि:॥
 
 
अनुवाद
जिनके हृदय में मंगलमय भगवान श्रीहरि निवास करते हैं, उनके सभी कार्य सदैव मंगलमय होते हैं - किसी भी कार्य में कभी अशुभता नहीं होती।
 
In whose hearts the auspicious Lord Shri Hari resides, all their tasks are always auspicious – there is never any inauspiciousness in any task.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)