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mahabharat 12.47.d21: कल्कि रूप में श्री हरि को नमस्कार है, जो कलियुग आने पर घोड़े पर सवार होकर म्लेच्छों का संहार करके धर्म की स्थापना करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d21
 
 
श्लोक  12.47.d21 
हनिष्यति कलौ प्राप्ते म्लेच्छांस्तुरगवाहन:।
धर्मसंस्थापको यस्तु तस्मै कल्क्यात्मने नम:॥
 
 
अनुवाद
कल्कि रूप में श्री हरि को नमस्कार है, जो कलियुग आने पर घोड़े पर सवार होकर म्लेच्छों का संहार करके धर्म की स्थापना करेंगे।
 
Salutations to Shri Hari in the form of Kalki who, when Kaliyuga arrives, will ride on a horse and kill the mlecchas to establish dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)