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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज
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श्लोक d18
श्लोक
12.47.d18
वासुदेवत्वमागम्य यदोर्वंशसमुद्भव:।
भूभारहरणं चक्रे तस्मै कृष्णात्मने नम:॥
अनुवाद
श्री कृष्ण, श्री हरि की आत्मा को नमस्कार है, जिन्होंने यदुवंश में वासुदेव के रूप में प्रकट होकर पृथ्वी का भार उतारा।
Salutations to the soul of Shri Krishna, Shri Hari, who appeared in the Yadu dynasty in the form of Vasudeva and relieved the earth of its burden.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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