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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज
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श्लोक d13
श्लोक
12.47.d13
त्रि:सप्तकृत्वो यश्चैको धर्मे व्युत्क्रान्तगौरवान्।
जघान क्षत्रियान् संख्ये तस्मै क्रोधात्मने नम:॥
अनुवाद
उन क्रोधी परशुराम को नमस्कार है, जिन्होंने अकेले ही युद्ध में धर्म का अभिमान तोड़ने वाले क्षत्रियों का इक्कीस बार संहार किया।
Salutations to that wrathful Parashurama who single-handedly killed twenty-one times in battle the Kshatriyas who had violated the pride of religion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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