श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  12.47.d11 
वामनं रूपमास्थाय बलिं संयम्य मायया।
त्रैलोक्यं क्रान्तवान् यस्तु तस्मै क्रान्तात्मने नम:॥
 
 
अनुवाद
वामन रूपी उन क्रांतिकारी भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार है, जिन्होंने माया के द्वारा बलि को बांध लिया था और अपने पैरों से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को नाप लिया था।
 
Salutations to that revolutionary Lord Krishna in the form of Vamana, who had bound Bali through Maya and measured the entire universe with his feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)