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इति विद्यातपोयोनिरयोनिर्विष्णुरीडित:।
वाग्यज्ञेनार्चितो देव: प्रीयतां मे जनार्दन:॥ ९९॥
अनुवाद
मैंने इस प्रकार वाणी रूपी यज्ञ के द्वारा ज्ञान और तप के जन्मस्थान भगवान विष्णु की पूजा की है, जिनका कोई दूसरा जन्मदाता नहीं है। इससे भगवान जनार्दन मुझ पर प्रसन्न हों।
I have worshipped Lord Vishnu, who is the birthplace of knowledge and penance and who has no other birth-giver, in this manner by means of the yajna in the form of speech. May Lord Janardan be pleased with me by this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥