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mahabharat 12.47.96: हरि' ये दो अक्षर संकट के समय कठिन मार्ग पर यात्रा-व्यय के समान हैं। ये संसार के रोग को दूर करने वाली औषधि के समान हैं और सब प्रकार के दुःखों और शोकों से रक्षा करते हैं॥ 96॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  12.47.96 
प्राणकान्तारपाथेयं संसारोच्छेदभेषजम्।
दु:खशोकपरित्राणं हरिरित्यक्षरद्वयम्॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
हरि' ये दो अक्षर संकट के समय कठिन मार्ग पर यात्रा-व्यय के समान हैं। ये संसार के रोग को दूर करने वाली औषधि के समान हैं और सब प्रकार के दुःखों और शोकों से रक्षा करते हैं॥ 96॥
 
The two syllables 'Hari' are like the travel expenses in times of crisis on a difficult path. They are like medicine to get rid of the disease of the world and they save one from all kinds of sorrow and grief.॥ 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)