श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  12.47.95 
नमो ब्रह्मण्यदेवाय गोब्राह्मणहिताय च।
जगद्धिताय कृष्णाय गोविन्दाय नमो नम:॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मणों के प्रेमी, गौओं और ब्राह्मणों के हितैषी हैं, तथा सम्पूर्ण जगत का कल्याण करने वाले हैं, उन भगवान गोविन्द को नमस्कार है।
 
Salutations to Lord Govind, who is a lover of Brahmins and a well-wisher of cows and Brahmins, who brings welfare to the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)