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mahabharat 12.47.91: जो लोग भगवान गोविंद को नमस्कार करते हैं, जिनकी कांति सन के फूल के समान श्याम है, जिनका शरीर पीले वस्त्रों से सुशोभित होता है, जो अपने वास्तविक स्वरूप से कभी विचलित नहीं होते, वे कभी भयभीत नहीं होते॥91॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  12.47.91 
अतसीपुष्पसंकाशं पीतवाससमच्युतम्।
ये नमस्यन्ति गोविन्दं न तेषां विद्यते भयम्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग भगवान गोविंद को नमस्कार करते हैं, जिनकी कांति सन के फूल के समान श्याम है, जिनका शरीर पीले वस्त्रों से सुशोभित होता है, जो अपने वास्तविक स्वरूप से कभी विचलित नहीं होते, वे कभी भयभीत नहीं होते॥91॥
 
Those who bow to the Lord Govinda, whose radiance is dark like the flax flower, whose body looks beautiful with yellow clothes, who never deviates from his true form, are never afraid. ॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)