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अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज
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श्लोक 88
श्लोक
12.47.88
न हि पश्यामि ते भावं दिव्यं हि त्रिषु वर्त्मसु।
त्वां तु पश्यामि तत्त्वेन यत् ते रूपं सनातनम्॥ ८८॥
अनुवाद
मैं तीनों लोकों में आपके दिव्य जन्म का रहस्य नहीं जान सकता; सत्य की दृष्टि से मैं आपके सनातन स्वरूप को ही लक्ष्य करता हूँ ॥ 88॥
I cannot fathom the secret of Your divine birth in the three worlds; from the perspective of truth I aim at Your eternal form. ॥ 88॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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