श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  12.47.86 
नमस्ते त्रिषु लोकेषु नमस्ते परतस्त्रिषु।
नमस्ते दिक्षु सर्वासु त्वं हि सर्वमयो निधि:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों में व्याप्त आपको नमस्कार है, तीनों लोकों से परे निवास करने वाले आपको नमस्कार है, समस्त दिशाओं में फैले हुए आपको नमस्कार है; क्योंकि आप सम्पूर्ण वस्तुओं के पूर्ण भण्डार हैं ॥ 86॥
 
Salutations to You who pervade the three worlds, salutations to You who resides beyond the three worlds, salutations to You who is spread in all directions; because You are the full storehouse of all things. ॥ 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)