Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.47.80: जो जटाधारी और दण्डधारी हैं, जिनका शरीर लम्बा है और जिनका जलपात्र तरकस का काम करता है, उन ब्रह्माजी रूपी भगवान को नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  12.47.80 
जटिने दण्डिने नित्यं लम्बोदरशरीरिणे।
कमण्डलुनिषङ्गाय तस्मै ब्रह्मात्मने नम:॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
जो जटाधारी और दण्डधारी हैं, जिनका शरीर लम्बा है और जिनका जलपात्र तरकस का काम करता है, उन ब्रह्माजी रूपी भगवान को नमस्कार है।
 
Salutations to the Lord in the form of Brahmaji, who has matted hair and a staff, has a long body and whose water pot serves as a quiver.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)