श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  12.47.79 
अप्रमेयशरीराय सर्वतोबुद्धिचक्षुषे।
अनन्तपरिमेयाय तस्मै दिव्यात्मने नम:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
जिनका स्वरूप किसी प्रमाण का विषय नहीं है, जिनके ज्ञानरूपी नेत्र सर्वत्र फैले हुए हैं और जिनके भीतर अनन्त विषय हैं, उन दिव्य परब्रह्म को नमस्कार है ॥ 79॥
 
Salutations to that divine Supreme Being, whose nature is not the subject of any proof, whose eyes of wisdom are spread all around and who has within him infinite subjects. ॥ 79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)