श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  12.47.77 
यो मोहयति भूतानि स्नेहपाशानुबन्धनै:।
सर्गस्य रक्षणार्थाय तस्मै मोहात्मने नम:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
जो आसक्तिस्वरूप हैं और जो समस्त जीवों को प्रेम के बंधन में बाँधते हैं तथा सृष्टि की रक्षा के लिए उन्हें आसक्ति में रखते हैं, उन भगवान को नमस्कार है ॥ 77॥
 
Salutations to that God who is in the form of attachment and who binds all living beings in the bonds of love and keeps them under attachment for the protection of the creation. ॥ 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)