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mahabharat 12.47.76: जो श्री अनन्त नामक शेषनाग के रूप में रसातल में निवास करते हैं और सम्पूर्ण जगत् को अपने सिर पर धारण करते हैं, उन वीर्यस्वरूप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ॥76॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.47.76 
रसातलगत: श्रीमाननन्तो भगवान् विभु:।
जगद् धारयते कृत्स्नं तस्मै वीर्यात्मने नम:॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
जो श्री अनन्त नामक शेषनाग के रूप में रसातल में निवास करते हैं और सम्पूर्ण जगत् को अपने सिर पर धारण करते हैं, उन वीर्यस्वरूप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ॥76॥
 
I salute the Supreme Lord in the form of semen who resides in the abyss in the form of Sheshnag named Shri Anant and holds the entire world on His head. 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)