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श्लोक 75
श्लोक
12.47.75
यं न देवा न गन्धर्वा न दैत्या न च दानवा:।
तत्त्वतो हि विजानन्ति तस्मै सूक्ष्मात्मने नम:॥ ७५॥
अनुवाद
भगवान् के उस सूक्ष्म रूप को नमस्कार है, जिसे न देवता, न गन्धर्व, न दैत्य और न राक्षस ही ठीक से जान सकते हैं ॥ 75॥
Salutations to that subtle form of God, whom neither the gods, nor Gandharvas, nor devils, nor demons can accurately know. ॥ 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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