श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  12.47.73 
प्राणानां धारणार्थाय योऽन्नं भुङ्‍क्ते चतुर्विधम्।
अन्तर्भूत: पचत्यग्निस्तस्मै पाकात्मने नम:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
जो प्राणों की रक्षा के लिए भक्ष्य, भोज्य, चोष्य, लेह्य - चार प्रकार के अन्न का अर्पण करते हैं तथा स्वयं पेट के अन्दर अग्नि रूप में स्थित अन्न को पचाते हैं, मैं उन शुद्ध भगवान् स्वरूप को नमस्कार करता हूँ ॥73॥
 
For the protection of life, those who offer four types of food - Bhakshya, Bhojya, Choshya, Lehya and themselves digest the food present in the form of fire inside the stomach, I salute those pure form of God. 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)