श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.47.70 
पर: कालात् परो यज्ञात् परात् परतरश्च य:।
अनादिरादिर्विश्वस्य तस्मै विश्वात्मने नम:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जो काल से परे हैं, यज्ञों से परे हैं और जो परब्रह्म से भी परे हैं, जो सम्पूर्ण जगत् के आदि हैं, किन्तु जिनका कोई आदि नहीं है, उन परमात्मा को नमस्कार है ॥70॥
 
Salutations to that Supreme Soul who is beyond time, who is beyond sacrifices and who is beyond the beyond, who is the beginning of the whole universe, but who has no beginning. ॥ 70॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)