श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.47.69 
यस्याग्निरास्यं द्यौर्मूर्धा खं नाभिश्चरणौ क्षिति:।
सूर्यश्चक्षुर्दिश: श्रोत्रे तस्मै लोकात्मने नम:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
जिनका मुख अग्नि है, जिनका सिर आकाश है, जिनकी नाभि आकाश है, जिनके चरण पृथ्वी हैं, जिनके नेत्र सूर्य हैं और जिनकी दिशाएँ कान हैं, उन परमात्मा को नमस्कार है ॥69॥
 
Salutations to that Supreme Being whose face is the fire, whose head is the heaven, whose navel is the sky, whose feet are the earth, whose eyes are the sun and whose directions are the ears. ॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)