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mahabharat 12.47.68: उन चारों वर्णों के रूप में परमेश्वर को नमस्कार है, जिनका मुख ब्राह्मण है, सम्पूर्ण क्षत्रिय जाति उनकी भुजाएँ हैं, वैश्य उनकी जंघाएँ और पेट हैं तथा जिनके चरणों पर शूद्र आश्रित हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  12.47.68 
ब्रह्म वक्त्रं भुजौ क्षत्रं कृत्स्नमूरूदरं विश:।
पादौ यस्याश्रिता: शूद्रास्तस्मै वर्णात्मने नम:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
उन चारों वर्णों के रूप में परमेश्वर को नमस्कार है, जिनका मुख ब्राह्मण है, सम्पूर्ण क्षत्रिय जाति उनकी भुजाएँ हैं, वैश्य उनकी जंघाएँ और पेट हैं तथा जिनके चरणों पर शूद्र आश्रित हैं।
 
Salutations to that Supreme Lord in the form of four varnas, whose mouth are the Brahmins, the entire Kshatriya caste are the arms, the Vaishyas are the thighs and stomach and on whose feet the Shudras depend.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)