श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  12.47.67 
युगेष्वावर्तते योगैर्मासर्त्वयनहायनै:।
सर्गप्रलययो: कर्ता तस्मै कालात्मने नम:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
जो योगमाया के बल से प्रत्येक युग में अवतरित होते हैं और जो मास, ऋतु, ऋतु और वर्षों के द्वारा सृष्टि और प्रलय करते हैं, उन परब्रह्म को नमस्कार है ॥ 67॥
 
Salutations to that Supreme Being who is incarnate in each age by the power of Yogmaya and who causes creation and destruction by means of months, seasons, seasons and years. ॥ 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)