Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.47.63: जो रात्रि में भी जागते हैं और दिन में साक्षी रूप में स्थित रहते हैं, तथा जो सदैव सबके भले-बुरे को देखते रहते हैं, उन द्रष्टारूपी परमेश्वर को नमस्कार है ॥ 63॥ | mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो निषण्णो भवेद् रात्रौ दिवा भवति विष्ठित:।
इष्टानिष्टस्य च द्रष्टा तस्मै द्रष्ट्रात्मने नम:॥ ६३॥
अनुवाद
जो रात्रि में भी जागते हैं और दिन में साक्षी रूप में स्थित रहते हैं, तथा जो सदैव सबके भले-बुरे को देखते रहते हैं, उन द्रष्टारूपी परमेश्वर को नमस्कार है ॥ 63॥
Salutations to that seer-like Supreme Being who remains awake even at night and remains situated in the form of a witness during the day, and who always watches the good and bad of everyone. ॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥