श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  12.47.62 
यस्मात् सर्वा: प्रसूयन्ते सर्गप्रलयविक्रिया:।
यस्मिंश्चैव प्रलीयन्ते तस्मै हेत्वात्मने नम:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
जो समस्त सृष्टि और संहार के कारण हैं और जिनमें सब कुछ विलीन हो जाता है, उन परम पुरुष को नमस्कार है ॥ 62॥
 
Salutations to the Supreme Being who is the cause of all the manifestations of creation and destruction, and in whom everything dissolves. ॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)