श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  12.47.61 
यस्य केशेषु जीमूता नद्य: सर्वाङ्गसंधिषु।
कुक्षौ समुद्राश्चत्वारस्तस्मै तोयात्मने नम:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
जिनके सिर पर केशों के स्थान पर बादल हैं, शरीर के जोड़ों में नदियाँ हैं और पेट में चारों समुद्र हैं, उन जलरूपी परमेश्वर को नमस्कार है ॥ 61॥
 
Salutations to that water-like Supreme Being who has clouds in place of hair on his head, rivers in the joints of his body and the four oceans in his stomach. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)