Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.47.58: जो सम्पूर्ण तत्त्वों को ग्रसकर जगत् को जल से परिपूर्ण करते हैं और स्वयं बालक का रूप धारण करके अक्षयवट वृक्ष के पत्ते पर शयन करते हैं, उन मायावी बाल मुकुन्द को नमस्कार है ॥ 58॥ | mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो सम्पूर्ण तत्त्वों को ग्रसकर जगत् को जल से परिपूर्ण करते हैं और स्वयं बालक का रूप धारण करके अक्षयवट वृक्ष के पत्ते पर शयन करते हैं, उन मायावी बाल मुकुन्द को नमस्कार है ॥ 58॥
Salutations to that illusory Bal Mukunda, who, after devouring all elements, fills the world with water and who himself takes the form of a child and sleeps on the leaf of the Akshayavat tree. ॥ 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥