श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.47.56 
अपुण्यपुण्योपरमे यं पुनर्भवनिर्भया:।
शान्ता: संन्यासिनो यान्ति तस्मै मोक्षात्मने नम:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
उन मोक्षस्वरूप भगवान को नमस्कार है, जिन्हें पाप-पुण्य नष्ट हो जाने पर पुनर्जन्म के भय से मुक्त हुए शान्तचित्त संन्यासी प्राप्त करते हैं ॥56॥
 
Salutations to God, the form of salvation, who is attained by peaceful sannyasis who are freed from the fear of rebirth after their sins and virtues are destroyed. 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)