श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.47.49 
य: शेते योगमास्थाय पर्यङ्के नागभूषिते।
फणासहस्ररचिते तस्मै निद्रात्मने नम:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जो निद्रास्वरूप परमेश्वर हैं, जो अपनी योगमाया का आश्रय लेकर शेषनाग के हजार फनों से बनी शय्या पर सोते हैं, उन परमेश्वर को नमस्कार है ॥ 49॥
 
Salutations to that Supreme Being who is the embodiment of sleep, who, taking shelter in His Yogmaya, sleeps on a bed made of a thousand hoods of Sheshnag. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)