श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.47.48 
यज्ञाङ्गो यो वराहो वै भूत्वा गामुज्जहार ह।
लोकत्रयहितार्थाय तस्मै वीर्यात्मने नम:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
उन वीर्यरूपी भगवान को नमस्कार है जिन्होंने तीनों लोकों के हित के लिए यज्ञीय वराह का रूप धारण करके इस पृथ्वी को रसातल से ऊपर उठाया।
 
Salutations to God in the form of semen who raised this earth from the abyss by taking the form of a sacrificial boar for the benefit of the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)