Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.47.45: जो 'यजु' नाम धारण करने वाले स्तोत्ररूपी भगवान हैं, जो वेदरूपी पुरुष हैं, जिनके अंग गायत्री आदि हाथ-पैर आदि हैं, जिनका सिर यज्ञ है और जिनके सांत्वना देने वाले शब्द 'रथन्तर' और 'बृहत्' नामक साम हैं, उन 'यजु' नाम धारण करने वाले स्तोत्ररूपी भगवान को नमस्कार है ॥45॥ | mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो 'यजु' नाम धारण करने वाले स्तोत्ररूपी भगवान हैं, जो वेदरूपी पुरुष हैं, जिनके अंग गायत्री आदि हाथ-पैर आदि हैं, जिनका सिर यज्ञ है और जिनके सांत्वना देने वाले शब्द 'रथन्तर' और 'बृहत्' नामक साम हैं, उन 'यजु' नाम धारण करने वाले स्तोत्ररूपी भगवान को नमस्कार है ॥45॥
Salutations to the God in the form of Stotra who bears the name 'Yaju', who is the man in the form of Vedas, whose parts are Gayatri etc.'s hands, feet, etc., whose head is Yagya and whose consoling words are the Samas named 'Rathantar' and 'Brihat'. 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥