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mahabharat 12.47.44: उन परम पुरुष को नमस्कार है जिन्हें सत्रह अक्षर वाले मन्त्रों से - चार 1, चार 2, दो 3, पाँच 4 और दो 5 - से आहुति दी जाती है। ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.47.44 
चतुर्भिश्च चतुर्भिश्च द्वाभ्यां पञ्चभिरेव च।
हूयते च पुनर्द्वाभ्यां तस्मै होमात्मने नम:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उन परम पुरुष को नमस्कार है जिन्हें सत्रह अक्षर वाले मन्त्रों से - चार 1, चार 2, दो 3, पाँच 4 और दो 5 - से आहुति दी जाती है। ॥44॥
 
Salutations to the Supreme Being who is offered oblations with the seventeen letter mantras - four 1's, four 2's, two 3's, five 4's and two 5's. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)