श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.47.42 
यं बृहन्तं बृहत्युक्थे यमग्नौ यं महाध्वरे।
यं विप्रसंघा गायन्ति तस्मै वेदात्मने नम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त महायज्ञ के समय, अग्निहोत्र के समय तथा महायज्ञ में ब्राह्मण समुदाय द्वारा ब्रह्मरूप से स्तुति किए जाने वाले वेदस्वरूप भगवान् को नमस्कार है ॥42॥
 
Salutations to the Lord in the form of Vedas who is praised in the form of Brahm by the Brahmin group at the time of the above mentioned great yagya, during the fire ceremony and in the Mahayagya. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)