श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.47.4 
विकीर्णांशुरिवादित्यो भीष्म: शरशतैश्चित:।
शुशुभे परया लक्ष्म्या वृतो ब्राह्मणसत्तमै:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों बाणों से बिंधे हुए भीष्मजी अपनी किरणों को चारों ओर फैलाते हुए सूर्य के समान अत्यंत शोभायमान हो रहे थे। उनके चारों ओर अनेक श्रेष्ठ ब्राह्मण बैठे हुए थे॥4॥
 
Pierced by hundreds of arrows, Bhishma looked very beautiful like the Sun spreading its rays all around. Numerous great Brahmins were sitting surrounding him. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)