श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.47.29 
यं देवं देवकी देवी वसुदेवादजीजनत्।
भौमस्य ब्रह्मणो गुप्त्यै दीप्तमग्निमिवारणि:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जैसे अरणी प्रज्वलित अग्नि को प्रकट करती है, उसी प्रकार देवकी देवी ने इस भूतल पर रहने वाले ब्राह्मणों, वेदों और यज्ञों की रक्षा के लिए वसुदेवजी के तेज से उन प्रभु को प्रकट किया था॥29॥
 
Just as Arani manifests the burning fire, in the same way Devaki Devi had manifested that Lord with the splendor of Vasudevji for the protection of the Brahmins, Vedas and Yagyas living on this ground floor. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)