Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.47.22-23h: ईश्वर नित्य (कभी नाश न करने वाले) हैं और एक दृढ़ तना हुआ धागा हैं। यह कार्य-कारण जगत् उनमें उसी प्रकार गुथा हुआ है जैसे एक धागे में पुष्पों की माला। यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उनके शरीर में स्थित है; उन्होंने ही इस ब्रह्माण्ड की रचना की है ॥22 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ईश्वर नित्य (कभी नाश न करने वाले) हैं और एक दृढ़ तना हुआ धागा हैं। यह कार्य-कारण जगत् उनमें उसी प्रकार गुथा हुआ है जैसे एक धागे में पुष्पों की माला। यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड उनके शरीर में स्थित है; उन्होंने ही इस ब्रह्माण्ड की रचना की है ॥22 1/2॥
God is ever-existent (never perishable) and is like a strong stretched thread. This world of cause and effect is woven in Him like a garland of flowers in a thread. This entire universe is situated in His body; He is the one who created this universe. ॥22 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥