श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.47.2 
वैशम्पायन उवाच
शृणुष्वावहितो राजन् शुचिर्भूत्वा समाहित:।
भीष्मस्य कुरुशार्दूल देहोत्सर्गं महात्मन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - राजन! कुरुश्रेष्ठ! आप महात्मा भीष्म के देहावसान की कथा सावधानी, पवित्रता और एकाग्रता से सुनें॥2॥
 
Vaishampayanji says – King! Kurushrestha! You listen to the story of Mahatma Bhishma's demise with caution, purity and concentration. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)