vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज
»
श्लोक 19-20h
श्लोक
12.47.19-20h
नारायणादृषिगणास्तथा सिद्धमहोरगा:॥ १९॥
देवा देवर्षयश्चैव यं विदु: परमव्ययम्।
अनुवाद
नारायण के कारण ही ऋषि, सिद्ध, महासर्प, देवता और मुनि भी उन्हें अविनाशी परमात्मा के रूप में पहचानने लगे ॥191/2॥
Because of Narayana, the sages, Siddhas, great serpents, gods and sages also started recognizing him as the immortal Supreme Being. ॥191/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×