श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.47.19-20h 
नारायणादृषिगणास्तथा सिद्धमहोरगा:॥ १९॥
देवा देवर्षयश्चैव यं विदु: परमव्ययम्।
 
 
अनुवाद
नारायण के कारण ही ऋषि, सिद्ध, महासर्प, देवता और मुनि भी उन्हें अविनाशी परमात्मा के रूप में पहचानने लगे ॥191/2॥
 
Because of Narayana, the sages, Siddhas, great serpents, gods and sages also started recognizing him as the immortal Supreme Being. ॥191/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)