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mahabharat 12.47.18-19h: उनका न आदि है, न अंत। वे परम ब्रह्म हैं, परमात्मा हैं। न देवता, न ऋषिगण उन्हें जानते हैं। केवल भगवान श्री नारायण हरि, जो सबका पालन-पोषण करते हैं, ही उन्हें जानते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.47.18-19h 
अनाद्यन्तं परं ब्रह्म न देवा नर्षयो विदु:॥ १८॥
एको यं वेद भगवान् धाता नारायणो हरि:।
 
 
अनुवाद
उनका न आदि है, न अंत। वे परम ब्रह्म हैं, परमात्मा हैं। न देवता, न ऋषिगण उन्हें जानते हैं। केवल भगवान श्री नारायण हरि, जो सबका पालन-पोषण करते हैं, ही उन्हें जानते हैं।
 
He has no beginning or end. He is the Supreme Brahma, the Supreme Soul. Neither gods nor sages know Him. Only the Lord Shri Narayan Hari, who sustains and sustains everyone, knows Him. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)