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mahabharat 12.47.14-16h: ध्यान करते हुए वे तीव्र स्वर में भगवान मधुसूदन की स्तुति करने लगे। विद्वानों में श्रेष्ठ, बलवान, परम धर्मात्मा भीष्म हाथ जोड़कर योगेश्वर, पद्मनाभ, सर्वव्यापी, विजयी जगदीश्वर वासुदेव की इस प्रकार स्तुति करने लगे। 14-15 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 14-16h
 
 
श्लोक  12.47.14-16h 
स्वरेण हृष्टपुष्टेन तुष्टाव मधुसूदनम्॥ १४॥
योगेश्वरं पद्मनाभं विष्णुं जिष्णुं जगत‍्पतिम्।
कृताञ्जलिपुटो भूत्वा वाग्विदां प्रवर: प्रभु:॥ १५॥
भीष्म: परमधर्मात्मा वासुदेवमथास्तुवत्।
 
 
अनुवाद
ध्यान करते हुए वे तीव्र स्वर में भगवान मधुसूदन की स्तुति करने लगे। विद्वानों में श्रेष्ठ, बलवान, परम धर्मात्मा भीष्म हाथ जोड़कर योगेश्वर, पद्मनाभ, सर्वव्यापी, विजयी जगदीश्वर वासुदेव की इस प्रकार स्तुति करने लगे। 14-15 1/2
 
While meditating, he started praising Lord Madhusudan in a strong voice. Bhishma, the best among the learned, powerful, supremely religious, with folded hands started praising Yogeshwar, Padmanabha, omnipresent, victorious Jagdishwar Vasudev in this way. 14-15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)