श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  12.47.109 
ततो गिर: पुरुषवरस्तवान्विता
द्विजेरिता: पथि सुमना: स शुश्रुवे।
कृताञ्जलिं प्रणतमथापरं जनं
स केशिहा मुदितमनाभ्यनन्दत॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
उस समय मार्ग में बहुत से ब्राह्मण भगवान् श्रीकृष्ण का गुणगान करते और भगवान् श्रीकृष्ण प्रसन्न मन से उनकी स्तुति सुनते। बहुत से अन्य लोग हाथ जोड़कर उनके चरणों में प्रणाम करते और केशव का वध करने वाले केशव हृदय में बड़े हर्ष के साथ उन्हें नमस्कार करते॥109॥
 
At that time many Brahmins would sing praises of Lord Krishna on the way and Lord Krishna would listen to them with a happy mind. Many other people would bow down to his feet with folded hands and Kesava, the killer of Kesava, would greet them with great joy in his heart.॥109॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)