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mahabharat 12.47.108: महान पाण्डव और श्रीकृष्ण नगर के आकार के रथों पर सवार होकर बड़ी तेजी से चले, और उनके पहियों की तेज ध्वनि से पृथ्वी हिल रही थी।   |   mahabharat अध्याय 12.47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  12.47.108 
ते रथैर्नगराकारै: प्रयाता: पुरुषर्षभा:।
नेमिघोषेण महता कम्पयन्तो वसुन्धराम्॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
महान पाण्डव और श्रीकृष्ण नगर के आकार के रथों पर सवार होकर बड़ी तेजी से चले, और उनके पहियों की तेज ध्वनि से पृथ्वी हिल रही थी।
 
The great Pandavas and Sri Krishna went with great speed in chariots the size of cities, shaking the earth with the loud noise of their wheels.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)