श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  12.47.105 
विदित्वा भक्तियोगं तु भीष्मस्य पुरुषोत्तम:।
सहसोत्थाय संहृष्टो यानमेवान्वपद्यत॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
इधर पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण भीष्मजी की भक्ति जानकर बड़ी प्रसन्नता से सहसा उठकर रथ पर बैठ गए॥105॥
 
Here Purushottam Shri Krishna, after knowing about Bhishmaji's devotional service, suddenly got up and sat on the chariot with great joy. 105॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)