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अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज
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श्लोक 103
श्लोक
12.47.103
तस्मिन्नुपरते शब्दे ततस्ते ब्रह्मवादिन:।
भीष्मं वाग्भिर्बाष्पकण्ठास्तमानर्चुर्महामतिम्॥ १०३॥
अनुवाद
जब भीष्मजी बोलना बंद कर गए, तब वहाँ बैठे हुए ब्राह्मणवादी ऋषियों ने नेत्रों में आँसू भरकर परम बुद्धिमान भीष्मजी की बहुत प्रशंसा की ॥103॥
When Bhishmaji stopped speaking, the Brahminist sages sitting there, with tears in their eyes, praised the most intelligent Bhishmaji profusely. 103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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