श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 47: भीष्मद्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति—भीष्मस्तवराज  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.47.1 
जनमेजय उवाच
शरतल्पे शयानस्तु भरतानां पितामह:।
कथमुत्सृष्टवान् देहं कं च योगमधारयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा: भरतवंश के पितामह भीष्म ने बाणों की शय्या पर लेटे हुए किस प्रकार शरीर त्याग दिया था और उस समय उन्होंने कौन-सा योग किया था?॥1॥
 
Janamejaya asked: How did Bhishma, the grandfather of the Bharata dynasty, give up his body while lying on a bed of arrows, and what Yoga did he practice at that time?॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)