Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.46.5: तुम्हारे रोंगटे खड़े हो गए हैं। तुम बिल्कुल भी नहीं हिल रहे हो। तुम्हारी बुद्धि और मन भी शांत हैं। माधव! तुम लकड़ी, दीवार या पत्थर के समान निश्चल हो गए हो ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.46.5 
नेङ्गन्ति तव रोमाणि स्थिरा बुद्धिस्तथा मन:।
काष्ठकुडॺशिलाभूतो निरीहश्चासि माधव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे रोंगटे खड़े हो गए हैं। तुम बिल्कुल भी नहीं हिल रहे हो। तुम्हारी बुद्धि और मन भी शांत हैं। माधव! तुम लकड़ी, दीवार या पत्थर के समान निश्चल हो गए हो ॥5॥
 
Your hair has stood on end. You are not moving at all. Your intellect and mind are also calm. Madhava! You have become motionless like a piece of wood, a wall or a stone. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)