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mahabharat 12.46.4: गोविन्द! मन, वाणी आदि समस्त इन्द्रियों को आपने अपनी बुद्धि में लीन कर लिया है। इन्द्रियों के समस्त गुणों और सभी रमणीय देवताओं को आपने क्षेत्रपयान आत्मा में स्थापित कर दिया है। 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.46: युधिष्ठिर और श्रीकृष्णका संवाद, श्रीकृष्णद्वारा भीष्मकी प्रशंसा और युधिष्ठिरको उनके पास चलनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.46.4 
वाक् च सत्त्वं च गोविन्द बुद्धौ संवेशितानि ते।
सर्वे चैव गुणा देवा: क्षेत्रज्ञे ते निवेशिता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! मन, वाणी आदि समस्त इन्द्रियों को आपने अपनी बुद्धि में लीन कर लिया है। इन्द्रियों के समस्त गुणों और सभी रमणीय देवताओं को आपने क्षेत्रपयान आत्मा में स्थापित कर दिया है। 4॥
 
Govind! All the senses like mind and speech etc. have been absorbed in your intellect by you. You have established all the qualities and all the pleasing deities of the senses in the Kshetrapyaan soul. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)